| विज्ञान के नाम पर नाज़ियों द्वारा इंसानो पे किये गए दिल बहलादेने वाले प्रयोग | | Experiments by the Nazis in the name of science| PART 1

विज्ञान के नाम पर नाज़ियों द्वारा इंसानो पे किये गए दिल बहलादेने वाले प्रयोग (part  1 )


हे दोस्तों आज हम बात करने वाले हे नाज़ियों के द्वारा किये गए कुछ ऐसे प्रयोग जिसने इंसानियत के होने पर सवाल उठा दिए , 

1. ऊंचाई के प्रयोग (High altitude experiments)


दूसरे विश्व युद्ध के दरमियान सन 1942 की शुरुआत मे, Dachu concentration camp  में जर्मनो द्वारा पकडेगए कैदियो को कुछ शोधकर्ताओ द्वारा जर्मन पायलटो की सहायता के लिए प्रयोगो में इस्तेमाल किया गया था। इन कैदियों को एक कम दबाव वाले चैम्बर इस्तेमाल करके 68000 फीट ( 21000 मीटर ) तक की ऊंचाई पर स्तिथ परिस्तिथियों का अनुकरण करवाया जाता और यह भी अफवा थी की जो कोई इस शुरुआती प्रयोग से बच जाता उनके दिमाग पर प्रयोग किये जाते अगर आंकड़ों कि माने तो हर 200 कैदियो में से 80 शुरूआती प्रयोग में ही मारे जाते बाकिओको बाद में मौत के घाट उतरदिया जाता
      डॉ.  सिग्मंड रसचर

5 अप्रैल, 1942 को डॉ.  सिग्मंड रसचर और हेनरिक हिमलर के बीच एक पत्र में, रसचर ने कम दबाव वाले प्रयोग के परिणामो के बारे में बताया उन्होंने बताया की कम ऑक्सीजन मिलने की वजह से कैदी घुटन महसूस करता है और उसके व्यवहार बदलाव आने लगते जिसपे  खुद डॉ. सिग्मंड रसचर और उनके साथी डॉ. ध्यान देते। उन्होंने बताया की एक 37 साल के कैदी ने 4 मिनिट के अंदर ही आपने सिर हिलना चालू कर दिया था और उसके एक ही मिनिट के बाद वो बेहोश हो गया , और वो एक मिनिट में सिर्फ 3 ही बार साँस लेता है , धीरे धीरे ऑक्सीजन की कमी के कारन वो 30 मिनिट में साँस लेना बंध कर देता है, उसका शरीर नीला होने लगता , मुंह से झाग निकलने लगे और थोड़ी ही देर में उस कैदी की दर्दनाक मौत हो जाती है  

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2.रक्त तो बहता रोकने के लिए किये गए प्रयोग (Blood coagulation experiments)


विश्व युद्ध की लड़ाई के दरमियान कई सारे सैनिक गोली लगने क कारण घायल हो जाते और रक्त बहने लगता, इस लड़ाई और सर्जरी के दरमियान बहते रक्त को रोकने के लिए डॉ सिग्मंड रसचर द्वारा रक्त तो जमाने के लिए बीट और पेक्टिन का मिश्रण का उपयोग करने का सोचा, इस मिश्रण प्ररिक्षण पकडे गए कैदियों पर किया गया |   इस परिक्षण के दरमियान पकडे गए कैदियों के सीने या गले पर गोली चलाई जाती और बाद में उन जख्मो पर यह मिश्रण लगाया जाता | 


विज्ञान के नाम पर नाज़ियों द्वारा इंसानो पे किये गए दिल बहलादेने वाले प्रयोग (part  1 )




3. जहर के साथ प्रयोग (Experiments with poison)


दिसंबर 1993 से जनवरी 1944 के बिच पकडे किये कैदियों को उनकी जानकारी के बिना ही उनके खाने में उनको जहर दिया जाता , जहर के असर से तुरंत ही उनकी मौत हो जाता या फिर उनको मारकर तुरंत ही उनका शव परिक्षण किया जाता (autopsy) | सितंबर 1944 में नाज़ियों ने आपने दुश्मनो पर जहर की परत चढाई हुई गोलियो (bullet) का इस्तेमाल किया की जिससे उनके दुश्मनो की दर्दनाक मृत्यु हुई | 



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4. बर्फ में ज़माने वाले प्रयोंग (Freezing experiments)


उसी समय दरम्यान पकडे जाने वाले  कैदियों को बिना कपड़ो के -6 °C के तापमान पर करीबन  60-66 मिनिट तक रखा जाता और उनके शरीर में होने वाले बदलावों को स्टडी किया जाता | हम, सब जानते हे की काफी काम तापमान में हमें  hypothermia हो जाता है इसी hypothermia के इलाज के लिए यह एक्सपेरिमेंट्स किये जाते | इस प्रयोग के दरमियान करीबन 350-400 कैदियों को दर्दनाक मौत मिली होगी | उनमे से एक प्रयोग ऐसा था जिसमे कैदी  को गले  बेहद ठन्डे पानी में डुबाया जाता और उसकी मौत तक का इंतजार किया जाता आंकड़ों क मुताबिक इस प्रयोग में करीब 100 कैदियो की मौत हुई थी | 


दूसरे कई और प्रयोगो क बारे में हम आपने अगले पोस्ट में जानेंगे , अगर आपको यह पोस्ट अच्छा लगे तो लाइक करिये , अगर कोई प्रश्न है तो कमेंट करिये और अपने सभी दोस्तों के साथ शेयर कीजिये , धन्यवाद THANK YOU 

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