| क्या है एनसेफेलिटिस (चमकी बुखार) जिसने बिहार में 150 से ज्यादा बच्चो की जान ले ली ? | | What is encephalitis ( chamki fever ) which killer more than 150 children in Bihar ? |

| क्या है एनसेफेलिटिस (चमकी बुखार) जिसने बिहार में 150 से ज्यादा बच्चो की जान ले ली  | | What is encephalitis ( chamki fever ) which killed more than 150 children in Bihar |


दोस्तों आप सब जानते ही होंगे की पिछले एक महीने से बिहार के मजफ्फपुर में इन्सेफेलाइटिस (encephalitis) जिसे भारत में चमकी बुखार के नाम से भी जाना चाहता है इस बीमारी ने 150 से ज्यादा बच्चो की जान ले ली और 300 ज्यादा बच्चे अभी भी अस्पतालों में भर्ती है। हम आप सब से निवेदन करते है की कृपा करके आप भी बच्चो के लिये प्राथना कीजिये की वो हो सके इतनी जल्दी ठीक हो जाए।



दोस्तों ऐसे टॉपिक पर बात करते वक्त एक भारतीय होने के नाती मन में एक प्रश्न जरूर उठता है की 2019 में भी ऐसी घटनाए देखने को मिलती जो की काफी दुःख की है क्युकी एक तरफ हम मंगल ग्रह  पे जाने की बाते करते है और दूसरी तरफ इक बीमारी की वजह से कई बच्चे मौत की नींद सौ रहे है। यह सब होने के बाद भी बिहार की सरकार चुप्पी साधे बैठी है। ना प्रसाशन कुछ कर रहा है और नाइ कोई और , इतना ही नई हम आपको बता देना चाहेंगे की इस मौत की सबसे बड़ी वजह भूख है क्यों वो आपको आगे पता चल जायेगा ...............


अगर बात की जाये मजफ्फपुर में फैली इस बीमारी के बारे में तो 15 या उससे छोटी उम्र के बच्चोको  ज्यादातर इस बीमारी ने अपने आगोश में लिया है। कही ना कही इस पुरे मामले में लीची का नाम भी बार बार सामने आ रहा है । तो क्या है पुरा मामला चलिए विस्तार से जानते है इसके बारे मैं, पहले जान लेते है इन्सेफेलाइटिस के बारे मैं ये क्या है ? कैसे होता है ? इसके लक्षण क्या है ? और इसका इलाज कैसे किया जा सकता है ?

 इन्सेफेलाइटिस क्या है ?? ( What is encephalitis ? )


इन्सेफेलाइटिस (encephalitis) एक बीमारी है जो की इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम ( AES Acute encephalitis syndrome ) का एक भाग है। अगर बात करे AES की तो यह कोई बीमारी नै है पर एक  बिमारिओ के समूह का नाम है जिसमे बहुत सारी बीमारिया शामिल है जैसे की ह्यपोग्लीसेमिआ ( Hypoglycemia ), जापानीज इन्सेफेलाइटिस ( Japanese encephalitis), हर्पीस मैनिंजाइटिस ( Herpes meningitis ), रेस सिंड्रोम ( Race syndrome ), सेलेब्रल मलेरिया ( cerebral malaria ) और भी बहुत सारी  बीमारिया है जो इस ग्रुप में आती है।

इन्सेफेलाइटिस किस कारणो से होता है  ?? ( Causes of encephalitis )

दोस्तों इन्सेफेलाइटिस होने के  सारे कारण  है जैसे की ......

वायरल संक्रमण ( Viral infection )

वायरल  इन्सेफेलाइटिस एक तीव्र गति से फैलने वाला इंफक्शन है और यह बहुत सारे वायरस के कारण हो सकता है जिसमे से सबसे सामान्य वायरस है हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस ( Herpes simplex ), और अन्य जैसे की रेबिस वायरस ( rabies virus ), पोलियो वायरस ( Polio virus ) और मैसेल्स ( measles virus ). 

बैक्टीरियल संक्रमण ( Bacterial infection )

यह बैक्टीरिया से भी हो सकता है बैक्टीरिया जैसे की मैनिंजाइटिस कई बार अगर कोई उपदंश ( Syphilis ) पीड़ित है तो उसको यह बीमारी होने की संभावनाए बढ़ जाती है। ऐसे ही अगर कोई बीमारी से गुजर रहा है तो उसको इन्सेफैलिटिस होने के जोखिम बढ़ जाता है क्योकि जब हम बीमार होते है तब हमारे शरीर की रोग प्रतिकारक शक्ति काम हो जाती है तो किसी और बीमारी से संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है। 

बिहार के मजफ्फपुर में इन्सेफैलिटिस फैलने की वजह क्या थी ??

दोस्तों जैसे की आपने जाना की इन्सेफैलिटिस ज्यादातर बैक्टीरिया या फिर वायरस की वजह से होता है पर बिहार के मजफ्फपुर में इन्सेफेलाइटिस होने की वजह अलग है कही ना कही बार बार इस सबमे लीची का नाम सामने आ रहा है।

बिहार के मजफ्फपुर और 12 दूसरे राज्य जहा पर लीची की खेती होती है वहां पर भी कई इन्सेफेलाइटिस के  सामने आये है।




दरअसल गावो में जो गरीब घर के बच्चे होते है उनके शरीर में पहले से ही पोशकद्रव्यों की कमी होती है या नी की वो सब पहले से ही कुपोषण से पीड़ित है उनमे पहले से ही विटामिन्स ( Vitamins ), प्रोटीन्स ( Proteins ) और कार्बोहाइड्रेट्स ( Carbohydrates ) की कमी होती है।  ऐसे बच्चे जब खेतो में खेलने के लिए जाते तब वो वहा लीची खा लेते है और कभी वो कच्ची लीची खा लेते है या फिर लीची के साथ उसका बीज भी खा लेते है। शोधकर्ताओ का मानना है की कच्ची लीची और लीची की बीज में एक विषैला पदार्थ होता है जिसे मेथाय्ल सायक्लोप्रोपायल गलायसिन (MCPG, methyl cyclopropyl glycine  )  नाम से जाना जाता है दरसल यह पदार्थ शरीर में अचानक से  लहू मै ग्लूकोज़ का स्तर कम कर देता है।




जो भी बच्चे खाली पेट लीची खाने के बाद कुछ भी खाने के बाद सो जाते है तब रात को लीची के विषैले पदार्थ की वजह से उनमे ग्लूकोज का लेवल काफी कम हो जाता है और शरीर के द्वारा लिवर में संग्रहीत ग्लूकोजका भी इस्तेमाल कर लेता है जिससे शरीर में ग्लूकोज की भारी कमी हो जाती है जिसकी वजह से इन्सेफेलाइटिस होने का खतरा बढ़ जाता है।

दोस्तों आपको तो पता ही होगा की सिर्फ हमारा दिमाग ही एक दिन में करीबन 140-150 ग्राम तक ग्लूकोज का इस्तेमाल कर लेता है। पर जब कभी भी पुरे शरीर मै ग्लूकोज़ की मात्रा कम हो जाती है तब दिमाग को पर्याप्त मात्रा में ग्लूकोज नई  मिल पाता जिससे वो काम करना बंध कर देता है। यह सब कारणों की वजह से इन्सेफेलाइटिस होने की सम्भावनाए बढ़ जाती है। ज्यादातर कम उम्र के बच्चे ही इस बीमारी के शिकार बनते है और बात करे मजफ्फपुर की तो वहाके कई सारे परिवार गरीबी रेखा के निचे अपना  जीवन बिता रहे है और तो और वहां की हॉस्पिटल्स में नाइ जरूरियात के हिसाब से डॉक्टर्स की संख्या है और नाइ जरूरी साधन सामग्री। 

इन्सेफेलाइटिस के लक्षण क्या है ? ( What are the symptoms of encephalitis )

अगर बात करे इसके लक्षणों की तो जो भी इन्सेफेलाइटिस से ग्रस्त है या जिस किसीको भी इन्सेफेलाइटिस बीमारी है उसे बहुत ज्यादा सरदर्द महसूस होगा, ज्यादा बुखार आना , दिमाग पर सूजन आ जाना  ( Brain inflammation ) , होश खो देना ( Loss of conscious ) और भूल जाना कॉमन है ( Loss of memory ). 



पता कैसे करे की किसीको इन्सेफेलाइटिस है ? ( How to diagnose encephalitis )

इन्सेफेलाइटिस को ब्रेन स्कैन ( Brain scan ) की जिससे दिमाग के ऊपर सूजन है या नई यह मालूम किया जा सकता है, ब्लड टेस्ट ( Blood test ) की जिसमे खून में ग्लूकोज की कितनी मात्रा है उससे अंदाजा लगाया जा सकता है की कोई इन्सेफेलाइटिस से पीड़ित है की नई है और यूरिन टेस्ट ( urine test ) से भी पता किया जा सकता है।


इन्सेफेलाइटिस का इलाज क्या है ? ( What are the treatment of encephalitis )

अगर इन्सेफेलाइटिस किसी वायरल इन्फेक्शन ( Viral infection ) से हुआ हे तो इसे एंटीवायरल ( Antiviral ) से और बैक्टीरियल इन्फेक्शन ( Bacterial infection ) है तो उसे एंटीबायोटिक ( Antibiotic ) से ठीक हो सकता है। लेकिन अगर इन्सेफेलाइटिस होने की वजह की वजह ग्लूकोज की कमी  होती है तो उसे ग्लूकोज चढ़ाकर उसका इलाज किया जा सकता है। 

बिहार वाले मामले में सरकार क्या रही है ? ( What is government doing in case of Bihar ?? )

हेल्ध मिनिस्टर ( Health minister )  हर्ष वर्धन ने बिहार में नया अनुसंधान केंद्र  ( research center ) बनाने की घोषणा की हे जिसके मुताबिक इसमें इन्सेफेलाइटिस के बारे में ज्यादा शोध की जायेगी और मालूम किया जायेगा की  बिहार में जो इन्सेफेलाइटिस देखने को मिल रहा है वो किस तरह का है क्या सही में सभी बच्चो में यह लीची खाने से फ़ैल रहा है या फिर इसका कोई और ही कारण  है। क्योकी बिहार में कई पीड़ित बच्चे ऐसे भी है जो 6 महीने से 18 महीने की उम्र के हे फिर भी वो इन्सेफेलाइटिस से ग्रस्त है। आपको यहाँ पर कच आंकड़े दिखा रहे है जिसमे भारत में इन्सेफेलाइटिस की वजह से कोनसे राज्य में कितनी मौते हुई है।



दोस्तों हम  आशा करते है की आपको हमारी दी गई यह जानकारी पसंद आयी होगी अगर आपको यह पसंद आई हो तो  आपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर जरूर कीजियेगा धन्यवाद, THANK YOU 





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