आखिर हमारे लिए ओज़ोन लेयर क्यों इतना जरुरी हे ?? After all, why is the ozone layer so important to us ??
हेल्लो दोस्तों एकबार फिर से आप सबका स्वागत हे हमारे ब्लॉग पे दोस्तों आपने कभी न कभी ओज़ोन लेयर के बारे में सुना ही होगा चाहे आप बात करे प्रदुषण की वातावरण की या फिर स्वास्थ्य की हर जगह कहि ना कही ओज़ोन का जिर्क कही ना कही आता ही हे क्या आपको ओज़ोन परत (layer) के बारे में जानते क्यों हमारे लिए और हमारी पृथ्वी के लिए ओज़ोन की परत क्यों जरुरी हे तो चलिए जानते हे............
आखिर हम बीमार क्यों पड़ते हे और हम अपने आप को बिमारिओ से कैसे बचा सकते हे ????WHY DO WE FALL ILL AND HOW CAN WE PREVENT OUR SELF FROM ILLNESS???
ओज़ोन कया है?
ओज़ोन लेयर के बारे में जानने से पहले ओज़ोन के बारे में जान लेते हे आखिर ओज़ोन क्या हे और कैसे बनता हे तो आपको बता दे की ओज़ोन एक प्रकार का वायु यानि की गैस हे की जो पृथ्वी के वातावरण पायी जाती हे। बात करे उसके कुछ गुणधर्मो की तो ओजोन एक ऐसी गैस है जो गंधयुक्त है और नीले रंग
की होती है।
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अगर सरल भाषा में कहे तो वो वातावरण में मौजूद O2 को O+O में विभाजित करती हे और इस विभाजित ऑक्सीजन के साथ एक और ऑक्सीजन का परमाणु जुड़ जाता हे जिससे ओज़ोन वायु का निर्माण होता हे। O+O2 = O3 यहाँ ओज़ोन को O3 और ऑक्सीजन को O2 से दर्शाया गया हे।
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ओजोन कैसे बनता है?
दोस्तों अगर बात करे ओज़ोन के बनने की तो आप सब जानते है की पृथ्वी के वातावरण में करीबन 21% तक ऑक्सीजन ( OXYGEN ) पायी जाती हे जब भी सूर्य से आने वाली अल्ट्रावायलेट ( पारबैंगनी , ULTRAVIOLET ) किरणे वातावरण में मौजूद ऑक्सीजन के संपर्क में आती हे तो वो ऑक्सीजन का विभाजन कर देती हे।अगर सरल भाषा में कहे तो वो वातावरण में मौजूद O2 को O+O में विभाजित करती हे और इस विभाजित ऑक्सीजन के साथ एक और ऑक्सीजन का परमाणु जुड़ जाता हे जिससे ओज़ोन वायु का निर्माण होता हे। O+O2 = O3 यहाँ ओज़ोन को O3 और ऑक्सीजन को O2 से दर्शाया गया हे।
क्या होगा अगर हमारा चाँद अचानक से गायब होया तो ??!! WHAT HAPPENS IF OUR MOON SUDDENLY DISAPPEAR ??
ओजोन परत क्या है?
ओज़ोन
परत की खोज 1913 में भौतिशास्त्री चार्ल्स फेबरी ( Charles fabri ) और हेनरी
बुशन ( Henry Bussion) ने की थी। उन्होंने जब सूर्य से आते हुए प्रकाश का वर्ण-पट ( spectrum ) देखा तो उन्होंने पाया की सूर्य प्रकाश का कुछ हिस्सा की जिसकी वेवलेंथ ( WAVELENGTH ) 310 नेनो मीटर ( NANO METER ) या उससे काम वेवलेंथ वाला रेडिएशन ( RADIATION ) पृथ्वी पे नहीं पहुँच रहा था। उन्होंने पाया की पृथ्वी के ऊपरी वातावरण में कुछ ऐसा हे की जो इन्हे ऊपर ही रोक रहा ही या उस रेडिएशन को सोख रहा हे।
सूर्य के प्रकाश का स्पेक्ट्रम का जो हिस्सा नहीं दिख रहा था वह हिस्सा ओजोन नाम के तत्व के साथ मेल खा रहा था, तब वैज्ञानिकों ने जान लिया कि यह ओजोन का लेयर है जो पृथ्वी को सूर्य के अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन से बचाता है। यह ओजोन लेयर स्ट्रेटोस्फीयर के नीचे पृथ्वी की समुन्द्र सपाटी से 10 से 50 किलोमीटर कीऊपरी दूरी तक पाया जाता है।
सूर्य के प्रकाश का स्पेक्ट्रम का जो हिस्सा नहीं दिख रहा था वह हिस्सा ओजोन नाम के तत्व के साथ मेल खा रहा था, तब वैज्ञानिकों ने जान लिया कि यह ओजोन का लेयर है जो पृथ्वी को सूर्य के अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन से बचाता है। यह ओजोन लेयर स्ट्रेटोस्फीयर के नीचे पृथ्वी की समुन्द्र सपाटी से 10 से 50 किलोमीटर कीऊपरी दूरी तक पाया जाता है।
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ओजोन की परत का महत्त्व ( IMPORTANCE OF OZONE LAYER )
ओजोन
परत का सबसे प्रमुख महत्व है कि वह UV rays को पृथ्वी तक आने से रोकता है। तो दोस्तों सबसे पहले यह जानते हैं की अल्ट्रावॉयलेट
रेडिएशन से क्या होता है? अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन पृथ्वी के
सभी जीवो के लिए हानिकारक है।
यह किरणे सिर्फ मनुष्य ही नहीं बल्कि जानवरों और पेड़-पौधों को भी नुकसान पहुंचाता है। यह अल्ट्रावायलेटकिरणें मनुष्य में स्किन कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी पैदा करता है। UV radiation 3 प्रकार के होते है, UVA, UVB,और UVC. इनमें से UVB स्किन के ऊपरी लेयर को एफेक्ट करता है। इस खतरनाक रेडिएशन से ओजोन लेयर पृथ्वी को बचाता है हालांकि ओजोन लेयर पतली है परंतु हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
यह किरणे सिर्फ मनुष्य ही नहीं बल्कि जानवरों और पेड़-पौधों को भी नुकसान पहुंचाता है। यह अल्ट्रावायलेटकिरणें मनुष्य में स्किन कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी पैदा करता है। UV radiation 3 प्रकार के होते है, UVA, UVB,और UVC. इनमें से UVB स्किन के ऊपरी लेयर को एफेक्ट करता है। इस खतरनाक रेडिएशन से ओजोन लेयर पृथ्वी को बचाता है हालांकि ओजोन लेयर पतली है परंतु हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
ओजोन
परत का क्षय ( DEPLETION IN OZONE LAYER )
पिछले कुछ सालों में ओजोन परत का क्षय हो रहा
है। कुछ रसायन ऐसे है जो ओजोन परत को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इन रसायनों में हाइड्रोसील क्लोरीन, ब्रोमीन, नाइट्रस ऑक्साइड, नाइट्रिक ऑक्साइड मुख्य है।औद्योगिक
प्रदूषण के कारण क्षोभ मंडल में ओजोन की मात्रा बढ़ रही है और समताप मंडल में इसकी मात्रा घट रही है हालांकि समताप मंडल में इसकी आवश्यकता
ज्यादा है।
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क्लोरोफ्लोरोकार्बन और ब्रोमो फ्लोरोकार्बन ओजोन परत के क्षय होने के प्राथमिक कारणों में से एक है। यू.एस. एजेंसी ऑफ एन्वायरनमेंटल प्रोटेक्शन के मत अनुसार क्लोरीन के एक परमाणु में ओजोन के एक लाख अणुओं को नष्ट करने की क्षमता होती है। 1980 मध्य में ओजोन कि परत विशेष रूप से प्रदूषण से प्रभावित हुई, इसे ओज़ोन छिद्र कहा जाता है। आज। के समय में ओजोन के लगभग 20 प्रतिशत भाग का क्षय हो चुका है।
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क्लोरोफ्लोरोकार्बन और ब्रोमो फ्लोरोकार्बन ओजोन परत के क्षय होने के प्राथमिक कारणों में से एक है। यू.एस. एजेंसी ऑफ एन्वायरनमेंटल प्रोटेक्शन के मत अनुसार क्लोरीन के एक परमाणु में ओजोन के एक लाख अणुओं को नष्ट करने की क्षमता होती है। 1980 मध्य में ओजोन कि परत विशेष रूप से प्रदूषण से प्रभावित हुई, इसे ओज़ोन छिद्र कहा जाता है। आज। के समय में ओजोन के लगभग 20 प्रतिशत भाग का क्षय हो चुका है।
ओजोन परत
के क्षय का कारण ( CAUSES OF OZONE LAYER DEPLETION )
सीएफसी का बहुत मात्रा में उपयोग ओजोन
की परत की कमी का मुख्य कारण है। यह सीएफसी प्रभावी रूप से संयंत्रों, रेफ्रिजरेटर, एरोसॉल मैं पाया जाता है। क्षय
का दूसरा कारण पेड़ों की कटाई है।
पृथ्वी पर पेड़ों की कटाई के कारण ऑक्सीजन की मात्रा कम हो
जाती है जिस वजह से ओज़ोन का निर्माण नहीं हो पाता।
केमिकल के अलावा भी कुछ प्राकृतिक घटनाएं है जो ओजोन की परत को कम करती है। जैसे कि यह माना जाता है कि ज्वालामुखी विस्फोट भी ओज़ोन की परत को प्रभावित करता है।
केमिकल के अलावा भी कुछ प्राकृतिक घटनाएं है जो ओजोन की परत को कम करती है। जैसे कि यह माना जाता है कि ज्वालामुखी विस्फोट भी ओज़ोन की परत को प्रभावित करता है।
ओजोन परत में क्षय की हानिकारक असर ( EFFECTS OF OZONE LAYER DEPLETION)
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ओजोन
की परत में क्षय होने के बहुत सारे कारण है। ओज़ोन परत के क्षय के कारण UV किरणे पृथ्वी पर आ रही है, जो पर्यावरणीय और स्वास्थ्य मुद्दों के लिए ज़िम्मेदार मानी जाती है।
UV किरणों
के कारण मनुस्य त्वचा के कैंसर का भोग बन
रहे है। आंखो की क्षति , त्वचा
की उम्र का तेजी से बढ़ना, प्रति रक्षा प्रणाली
क्षति, श्वास में कठिनाई, अस्थमा जैसी आदि बीमारियां UV किरणों के सीधे संपर्क में आने से होती
है। ये किरणे डीएनए में विकृति पैदा करती है और उसके रिपैर में बाधा डालती है। अगर ऐसे ही क्षय होता रहा तो एक दिन दक्षिणी ध्रुव में
बर्फ पिघलने पर महासागर का जलस्तर तेजी से बढ़ने
लगेगा, इस तरह के संकट से समुद्र तटीय इलाके जलमग्न हो जाएंगे और वहां के लोगों को विस्थापन के संकट का सामना करना पड़ेगा।
ओजोन परत
के क्षय को कैसे रोका जा सकता है? ( HOW WE PREVENT OZONE
LAYER DEPLETION? )
वर्तमान समय में पेड़ों की कटाई
और प्रदूषण के कारण ओज़ोन की परत तेज़ी से कम होती जा रही है। इसे रोकने लिए हमें ओ डी एस (ओजोन घटाने वाले पदार्थ ) का उपयोग ना करके इसके बदले ऐसे पदार्थ
का उपयोग करना चाहिए जिससे ओजोन की परत को नुकसान ना हो।
वृक्षारोपण करना चाहिए, जिससे उपरी वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा बनी रहे। कीटनाषकों का उपयोग कम करे। निजी वाहनों का सीमित उपयोग करे। इस तरह से हम ओज़ोन की परत का क्षय रोक सकते है।
वृक्षारोपण करना चाहिए, जिससे उपरी वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा बनी रहे। कीटनाषकों का उपयोग कम करे। निजी वाहनों का सीमित उपयोग करे। इस तरह से हम ओज़ोन की परत का क्षय रोक सकते है।
प्रत्येक वर्ष 16 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय ओजोन परत संरक्षण दिवस के रूप में मनाया जाता है।
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