शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता क्या है और कैसे काम करती है ?? जानिए हिंदी में.......

शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता क्या है और कैसे काम करती है ??

दोस्तों हमारे शरीर की जो बिमारिओ के खिलाफ लड़ने की ताकत है उसे रोगप्रतिरोधक शक्ति (इम्युनिटी) कहा जाता है की जिसमे अलग अलग प्रकार की कोशिकाए और अंग आपसे में मिलके बिमारिओ से लड़ते है।

                                        

दोस्तों  हम सब जानते है की अगर हमे कोई बीमारी होती हे तो हमारा शरीर उससे लड़ने का पूरा प्रयास करता हे और हमे उस बीमारी की झपेट में आने से बचाता है। लेकिन, लेकिन आपने कभी यह सोचा है की हमारा शरीर यह सब कैसे कर लेता है।  आखिर यह बिमारि या फिर बीमारी पैदा करने वाली जीवाणु और विशाणुओ से कैसे लड़ लेता है। 

तो आज हम यही जानने वाले है की आखिर हमारे शरीर में ऐसा क्या है की जो बिमारिओ से लड़ जगड कर हमे बचता है। तो बात करते है रोगप्रतिरोक शक्ति की ...............

                                       

रोगप्रतिरोधक शक्ति (इम्युनिटी) दो प्रकार की होती है

1. सहज शक्ति- INNATE IMMUNITY ( जन्म-जात रोगप्रतिरोधक शक्ति )

2. अनुकूली रोगप्रतिरोधक शक्ति-ADAPTIVE IMMUNITY 


1. सहज शक्ति- INNATE IMMUNITY ( जन्म-जात रोगप्रतिरोधक शक्ति )

यह रोगप्रतिरोधक शक्ति हमारे शरीर की बहार से रक्षा करता हे। यह एक शुरुआती सुरक्षा कवच हे जो हमे लगातार बाहरी तत्वों जैसे की जीवाणु, कीटाणु और विषाणुओ से बचाता हे। यही समज लीजिये की यह हमारे शरीररूपी देश के सरहद वाले सिपाही हे की जो किसी भी आंतकवादी को अंदर नहीं आने देते। 

                                       

यह रोगप्रतिरोधक शक्ति के भी हमारी सेना की तरह अलग अलग दल होते हे जो की अलग अलग तरह से हमारी रक्षा करते हे जैसे की 

1-शारीरिक बाधाएं (फिजिकल बैरियर)

2-रक्षात्मक प्रतिक्रिया (डिफेंस मैकेनिज़म)

  1-शारीरिक बाधाएं (फिजिकल बैरियर)

अगर बात करे शारीरिक बाधाए की तो उसमे हमारी त्वचा ( SKIN ) महत्वपूर्ण योगदान निभाती है। वो हमारे शरीर का बाहरी वो कवच हे जो हमें हर तरफ से बचता है।  चाहे बात करे बाहरी प्रदुषण की या बात करे जीवाणु और कीटाणु की हमारी त्वचा ही हे की जो हमे पहली सुरक्षा प्रदान करती है। 

                                

  2-रक्षात्मक प्रतिक्रिया (डिफेंस मैकेनिज़म)

हमारे शरीर द्वारा कुछ ऐसी प्रतिक्रिया दी जाती है जो हमारे शरीर में प्रवेश करने वाले हानिकारक तत्वों को नष्ट करने में बहुत जरुरी है।  चाहे बात करे आपके आँखों में आने वाले आंसू की, आपके पसीने की, आपके चहेरे की तैलिय त्वचा की या फिर बात करे आपके मुंह के अंदर के सलाइवा की इन सबमे कुछ ऐसे तत्व होते है जो बहार से आने वाले हानिकारक तत्वों का नाश करते रहते है। 

जब आपको मधुमक्खी के काटने के बाद सूजन होती है वो भी हमारे शरीर के रक्षात्मक प्रतिक्रिया का ही नतीजा है। 

आपके साँस लेने के समय अगर हवा के साथ कोई हानिकारक  तत्व आपके फेफड़ो के अंदर जा पहुँचते हे तो उनसे लड़ने के लिया या कहिये नष्ट करने के लिए वह पहले से ही बहुत सारी ऐसी कोशिकाए मौजूद होती है जो उनको नष्ट कर पाए। 

इनेट इम्युनिटी में कुछ ऐसी कोशिकाएं होती है जो रोगकारको के अटैक को रोकने में मदद करती है।जैसे की.........    

मास्ट सेल्स , मोनोसाइट्स, बेसोफिल्स, न्यूट्रोफिल्स, डैंड्राइटिक सेल्स, स्नोफिल्स, नैचरल किलर सेल्स

                                   

अनुकूली रोगप्रतिरोधक शक्ति-ADAPTIVE IMMUNITY (अडेप्टिव इम्युनिटी)

जैसे हमारी सेना के कुछ सिपाहीओ का काम आंतकवादी के देश के अंदर प्रवेश करने के बाद होता है वैसे ही इस रोगप्रतिरोधक शक्ति रोगकारक के हमारे शरीर में प्रवेश करने के बाद सक्रीय होती है।

                                        

जब कोई रोगकारक हमारे शरीर की पहेली सुरक्षा सिमा यानि की त्वचा और सहज शक्ति से बचकर हमारे शरीर के अंदर प्रवेश कर लेता तो तब हमारे शरीर के दूसरे अंदरूनी सैनिक अपने काम करने आ जाते है। 

इसमें शरीर की कोशिकाओं को सारे रोगकारको को ढूंढ ढूंढ मारना होता है इसलिए इसमें ज्यादा टाइम लगता है। इसके लिए हमारे शरीर के कोशिकाओं को बहार से आने वाले रोगकारको की पहचान करना भी जरुरी होता हे और यह पहचान करने के लिए और उनसे लड़ने के लिए बहुत सारे सिपाहीओं की जरूरत होती है। 

सारे रोगकारको जैसे की जीवाणु और विषाणुओ से लड़ने के लिये हमारे शरीर में बहुत सारे एंटीबॉडी (ANTIBODIES)  का निर्माण होता है। एंटीबॉडी प्रोटीन के ऐसे छोटो छोटे अणु है जिनमे रोगकारको को पहचानने की और उनसे लड़के की क्षमता होती है। 

                                     

उसके साथ साथ हमारे शरीर में कुछ कोशिकाए ऐसी होती है की जो शरीर में आने वाले सभी रोगकारको की यादे आपने पास रखती है उन्हें स्मृति कोशिकाए ( MEMORY CELL ) के नाम से जाना जाता है।

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जैसे अगर कोई अगर आंतकवादी हमारे देश में में घुस के कोई हानि पहुँचाता है तो हमारी सेना उनका नाम और चहेरे को ब्लैक लिस्ट में डाल देती हे ताकि अगली बार वो जब भी वापस आये तो उसे आसानी से रोका जा सके वैसे ही हमारे स्मृति कोशिकाए रोगकारक को यद् रखती है ताकि जब भी वो अगली बार हमारे शरीर में प्रवेश करे तब उससे आसानी से रोका जा सके।

यह यादे कुछ महीनो से कई सालो तक हमारे कोशिकाओं में रह सकती है अगर रोगकारक की वजह से कोई बड़ी बीमारी होती है तो उन्हें कई सालो या फिर पूरी जिंदगी याद रखा जाता है और छोटी बीमारि जैसे की ज़ुखाम उसकी यादे कुछ ही महीनो में ख़तम हो जाती है। 

आखिर यह B- कोशिकाए (B-cell) और T- कोशिकाए (T-cell) क्या है ?

                                 

दोस्तों B- कोशिकाए और T-कोशिकाए वो कोशिकाए है जो आपके शरीर की किसी भी स्तिथि में सुरक्षा करती है।  B-कोशिकाए आपके अस्थिमज्जा यानि की BONE MARROW में पैदा होती है और वही पे बड़ी होती है।  जबकि बात करे T-कोशिकाओं की तो वो आपके अस्थिमज्जा यानि की BONE MARROW में पैदा होती है लेकिन बड़ी आपके थाइमस (THYMUS) में होती है.

                                         B-cells | Ask A Biologist

इसमें से जो B-कोशिकाए होती है वो किसी भी दूसरी कोशिका के बहार पाए जाने वाले रोग कारको को नष्ट करती है जबकी बात करे T- कोशिकाओं की तो वो अगर कोई कोशिका पहले से रोगकारक यानि की जीवाणु या विषाणु से प्रभावित है तो उन कोशिकाओं को नष्ट करने का काम करेगी। 

अगर आप यह जानना चाहते है की कोशिकाए हमारे शरीर में आने वाले रोग कारको से किस प्रकार लड़ती है तो जुड़े रहिये हमारे साथ 

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