कोरोना के बारे सब कुछ जो आपको पता होना चाहिए। EVERYTHING THAT YOU SHOULD KNOW ABOUT CORONA ....|
भारत में आज यानि की 12 अप्रैल तक कोरोना से निपटने के लिए लगाए गए लोकडाउन को करीबन 19 दिन हो चुके है और भारत में 8000 से भी ज्यादा कोरोना के पोसिटिव पाए गए हे और आने वाले समय में यह बढ़ भी सकते है।
आज हम आपके लिए कुछ ऐसा लेके आए हे की जो आपको कोरोना के बारे में मालूम होना चाहिए।
क्या है कोरोना वायरस?
कोरोना वायरस का संबंध वायरस के ऐसे परिवार से है, जिसके संक्रमण से जुकाम से लेकर सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या हो सकती है। ऐसे ही कई और वायरस है की जिन्होंने पहले भी दुनिया में महामारी फैलाई हुई है जैसे की 2004 में आये हुए सार्स (SARS) ने पूरी दुनिया में कोहराम मचाया था।
लेकिन इस वायरस को पहले कभी नहीं देखा गया है. इस वायरस का संक्रमण नवम्बर/ दिसंबर में चीन के वुहान में शुरू हुआ था. डब्लूएचओ के मुताबिक, बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ इसके लक्षण हैं. अब तक इस वायरस को फैलने से रोकने वाला कोई टीका नहीं बना है.
विश्व स्वास्थय संगठन (WHO) का क्या कहना हे ?
दोस्तों डब्ल्यूएचो (WHO) ने कोरोना को 12 मार्च 2020 को वैश्विक महामारी (pandemic) घोषित कर दिया था यानी की कोरोना तब तक पूरी दुनिया में फ़ैल चूका था।
इसके साथ साथ विश्व स्वास्थय संगठन द्वारा कुछ ऐसे निर्देश जारी किए गए हे से हम कोरोना से संक्रमित होने से बच सकते हे ,
क्या हैं इस बीमारी के लक्षण?
इसके लक्षण फ्लू और साधारण बुखार से मिलते-जुलते हैं. संक्रमण के फलस्वरूप बुखार, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, नाक बहना और गले में खराश जैसी समस्या उत्पन्न होती हैं. यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है. इसलिए इसे लेकर बहुत सावधानी बरती जा रही है.कुछ मामलों में कोरोना वायरस घातक भी हो सकता है और इसकी वजह से मौत भी हो सकती है. खास तौर पर अधिक उम्र के लोग और जिन्हें पहले से अस्थमा, डायबिटीज़ और हार्ट की बीमारी है.
क्या हैं इससे बचाव के उपाय?
स्वास्थ्य मंत्रालय और डबल्यूएचओ (WHO) ने कोरोना वायरस से बचने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं. इनके मुताबिक, हाथों को साबुन से धोना चाहिए. अल्कोहल आधारित हैंड रब यानि सेनिटाइज़र का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.
खांसते और छीकते समय नाक और मुंह रूमाल या टिश्यू पेपर से ढककर रखें. जिन व्यक्तियों में कोल्ड और फ्लू के लक्षण हों उनसे कम से कम 6 फ़ीट की दूरी बनाकर रखें. अंडे और मांस के सेवन से बचें. जंगली जानवरों के संपर्क में आने से बचें.
कोविड-19 के बारे में बुनियादी जानकारी
12 अप्रैल तक पूरी दुनिया में सतरा लाक (1800000) से भी ज्यादा कोरोना के मामले सामने आ चुके है और एक लाक (100000) से भी ज्यादा लोगो की इस वायरस की वजह से मौत भी हो चुकी है।कोरोना वायरस यानी कि Coronavirus disease (COVID-19) बहुत सूक्ष्म लेकिन प्रभावी वायरस है. कोरोना वायरस मानव के बाल की तुलना में 900 गुना छोटा है. आकार में इस छोटे वायरस ने पूरी दुनिया को डरा दिया है. दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहर में नोवल कोरोना वायरस (कोविड-19) का पहला मामला जानकारी में आया.
इस संक्रमण से प्रभावित लोगों में बुखार, सर्दी-जुखाम, खांसी तथा सांस लेने में तकलीफ पाई गई थी. डाक्टरों ने पाया ये लक्षण सार्स से काफी मि ..
कोरोना की संक्रमित लोगो में कुछ ऐसे लक्षण पाए जाते हे
- तेज बुखार आनाः
- अगर किसी व्यक्ति को सुखी खांसी के साथ तेज बुखार है तो उसे एक बार जरूर जांच करानी चाहिए. यदि आपका तापमान 99.0 और 99.5 डिग्री फारेनहाइट है तो उसे बुखार नहीं मानेंगे. अगर तापमान 100 डिग्री फ़ारेनहाइट (37.7 डिग्री सेल्सियस) या इससे ऊपर पहुंचता है तभी यह चिंता का विषय है.
- कफ और सूखी खांसीः
- पाया गया है कि कोरोना वायरस कफ होता है मगर संक्रमित व्यक्ति को सुखी खांसी आना।
- सांस लेने में समस्याः
- कोरोना वायरस से संक्रमित होने के 5 दिनों के अंदर व्यक्ति को सांस लेने में समस्या हो सकती है. सांस लेने की समस्या दरअसल फेफड़ो में फैलते कफ के कारण होती है.
फ्लू-कोल़्ड जैसे लक्षणः
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर कभी-कभी बुखार, खांसी, सांस में दिक्कत के अलावा फ्लू और कोल्ड जैसे लक्षण भी हो सकते हैं.
डायरिया और उल्टीः
- कोरोना से संक्रमित लोगों में डायरिया और उल्टी के भी लक्षण देखे गए है. करीब 30 प्रतिशत लोगों में इस तरह के लक्षण पाये गए हैं.
सूंघने और स्वाद की क्षमता में कमीः
- कोरोना के काफी लक्षण सामान्य बुखार के जैसे ही हे तो जैसे बुखार में भी सूंघने सो स्वाद परखने की क्षमता कम हो जाती हे वैसे ही कोरोना के बहुत से मामलों में पाया गया है कि कोरोना से संक्रमित लोगों को सूंघने और स्वाद की क्षमता में कमी आती है.
कोरोना वायरस से मृत्युदर
- 9 साल तक के बच्चों में- 0 प्रतिशत
- 10-39 वर्ष तक के लोगों में 0.2 प्रतिशत
- 40-49 वर्ष तक के लोगों में 0.4 प्रतिशत
- 50-59 वर्ष तक के लोगों में 1.3 प्रतिशत
- 60-69 वर्ष तक के लोगों में 3.6 प्रतिशत
- 60-69 वर्ष तक के लोगों में 3.6 प्रतिशत
- 70-79 वर्ष तक के लोगों में 8 प्रतिशत
- 80 से ज्यादा वर्ष के लोगों में 14.8 प्रतिशत
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