आज के जमाने में प्रदुषण , जंक फ़ूड, रोगप्रतिकारकता
का अभाव, जैसे कई कारणो की वजह से बहुत सारी बीमारियां उत्पन्न हो रही है। यह बीमारियां
दवाइयां लेने से ठीक हो सकती है लेकिन कुछ ऐसी बीमारियां है जो जेनेटिकली यानी की वो आपके DNA से जुडी होती है जो माता पिता या फिर आपके पूर्वजों से आपमें आती है. या फिर कुछ बीमारीया ऐसी भी होती है जिनका इलाज दवाइयों से नही हो सकता। दोस्तों आज हम एक ऐसे तकनीक की बात करने वाले है की जिसकी मदद से हम कैंसर जैसी भयानक बीमारी का भी इलाज संभव कर सकते है।
तो दोस्तो आज हम जानेंगे की एक ऐसी कोशिका के बारे में जो हमारे
शरीर में होती है और जो ऐसी बीमारियों के सामने लड़ सकती है। दोस्तों आपको उसके बारे में जानते होंगे या फिर कही ना कही सुना होगा। इन कोशिकाओ को स्टेम कोशिका ( STEM CELL ) के नाम से जानी जाती है। तो सबसे पहले हम यह जानेंगे की आखिर यह स्टेम कोशिकाए क्या है?
स्टेम कोशिका क्या है?
दोस्तों स्टेम कोशिकाए एक ऐसी प्रकार की कोशिकाए हे जो शरीर
के किसी भी अंग के कोशिका के रूप में विकसित करने की क्षमता रखती हे। इसके साथ
ही ये अन्य किसी भी प्रकार की कोशिकाओं में बदल सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार इन
कोशिकाओं को शरीर की किसी भी कोशिका की मरम्मत या फिर उसकी नक़ल क्षमता रखती हे । इस प्रकार
यदि
आंख
की
कॉर्निया
की
कोशिकाएं
खराब
हो
जायें,
तो
उन्हें
स्टेम
कोशिकाओं
द्वारा
विकसित
कर
प्रत्यारोपित( TRANSPLANT )
किया
जा
सकता
है।
इस प्रकार यदि हृदय की कोशिकाएं खराब हो गईं, तो इनकी मरम्मत स्टेम कोशिका
द्वारा की जा सकती है। इन कोशिकाओं की मदद से हम शरीर के किसी भी अंग में हुए कैंसर
के कोषों
को बदल सकते हे।

1960 में कनाडा के
वैज्ञानिकों अर्नस्ट.ए.मुकलॉक और जेम्स.ई.टिल की खोज के बाद स्टेम कोशिका के
प्रयोग को बढ़ावा मिला। उन्होंने रक्त बनाने वाली स्टेम कोशिकाओ की खोज की थी और यह स्टेम कोशिका जो रक्त बनाती है वह अस्थिमज्जा (BONE-MARROW ) में
से पाई गई थी और इन्हे हामेटोपोटिक स्टेम सेल ( HSC) कहा जाता है।स्टेम कोशिका को भ्रूणीय (EMBRYONIC),
वयस्क (ADULT) तथा कॉर्डब्लड (CORD BLOOD) जेैसे प्रकारों में बांटा जाता है।
स्टेम कोशिकाए कैसे और कब बनती हे ?
दोस्तों आपको यह तो मालूम ही होगा की गर्भाधान (FERTILIZATION) के समय पुरुष के शुक्राणु (SPERM) और महिला के अंडाणु (Egg) मिलके युग्मनज (Zygote) का निर्माण करते हे आगे जाके यही युग्मनज (Zygote) भ्रूण (Embryo) में विकसित होता हे।
भ्रूण विकास के
दौरान एक स्टेज होता है, जिसे ब्लास्टोसिस्ट कहते हैं, इस अवस्था में जिन कोशिकाओ का निर्माण होता हे इन कोशिकाओ में शरीर के किसी भी पेशी (tissue ) का पुनःनिर्माण करने की क्षमता रखती हे। इन कोशिकाओं को बहु -सक्षम कोशिकाएं कहते हे , क्योंकि ये भ्रूण से प्राप्त की जातीं
हैं, इसलिये इन्हें भ्रूणीय स्टेम कोशिका कहा जाता हे। इसके बाद यह कोशिकाए जैसे जैसे विभाजित होती हे इनकी क्षमता कम होती जाती हे जिन्हे बाद में वयस्क स्टेम कोशिकाओ के नाम से जाना जाता हे।
इसके साथ साथ किसी भी व्यक्ति के जीवन में बहु -सक्षम स्टेम कोशिकाओं का निर्माण एक ही बार होता हे, वो भी तब जब की वो अपनी माता के गर्भ में हो। इसलिए उन्हें तब ही अलग करना जरुरी होता हे। इसके साथ साथ इन्हे माता के गर्भनाल से एकत्रित किया जाना होता हे इसके साथ साथ उन्हें लम्बे समय तक संग्रहित करना पड़ता हे इसलिए यह प्रक्रिया बाहूत महँगी होती हे इसलिए हर कोई इस प्रक्रिया का इस्तेमाल नहीं कर सकता।
स्टेम कोशिकाओं को कैसे निकला और संग्रह किया जाता हे ?
दोस्तों आपके मन में भी यह ख्याल जरूर आया होगा की अगर स्टेम कोशिकाए इतनी क्षमता रखती है तो क्यों हम इनका इस्तेमाल क्यों नई करते ? तो दोस्तों हम आपको बता दे की हर एक व्यक्ति की स्टेम कोशिकाए अलग अलग होती हे , इस में ऐसा नै कर सकते की किसी और व्यक्ति के स्टेम कोशिकाओ का इस्तेमाल किसी और व्यक्ति के लिए इस्तेमाल किया जा सके।
इसके साथ साथ किसी भी व्यक्ति के जीवन में बहु -सक्षम स्टेम कोशिकाओं का निर्माण एक ही बार होता हे, वो भी तब जब की वो अपनी माता के गर्भ में हो। इसलिए उन्हें तब ही अलग करना जरुरी होता हे। इसके साथ साथ इन्हे माता के गर्भनाल से एकत्रित किया जाना होता हे इसके साथ साथ उन्हें लम्बे समय तक संग्रहित करना पड़ता हे इसलिए यह प्रक्रिया बाहूत महँगी होती हे इसलिए हर कोई इस प्रक्रिया का इस्तेमाल नहीं कर सकता।
स्टेम कोशिकाओं का महत्व
स्टेम कोशकाए हमारे जीवन में बहुत ही महत्व रखती हे, क्योंकि सबसे पहले आपके शरीर के शुरुआती अंग जैसे ही ह्रदय, हाथ-पाव, दिमाग इन सबका निर्माण स्टेम कोशिकाओं से ही होता हे। इसके साथ साथ अगर किसी व्यक्ति की स्टेम कोशिकाए हमने पहले शेहि संगृहीत करके रखी हे तो भविष्यमे उसके जीवन में आने किसी भी बीमारी का इलाज संभव हो सकता हे। इसमें यह याद रखना जरुरी हे की बैक्टीरिया ( Bacteria ) और वायरस (Virus) जैसे सूक्ष्मजीवो से होने वाली बिमारिओ इलाज में स्टेम कोशिका सक्षम नई हे।
इसके साथ साथ अगर कीसी का कोई अंग में खराबी आती हे या वो काम करना बंद कर देता हे तो भी स्टेम कोशिकाओं की मदद से हम नए अंगो का निर्माण आसानी से कर सकते हे। आनुवंशिक बीमारिया जैसे की मधुमेह ( Diabetes ), डाउन सिंड्रोम (Down Syndrome) जैसी बिमारिओ का इलाज संभव हो सकता हे.
स्टेम कोशिकाओं का कहा और कैसे इस्तेमाल किया जा सकता हे वो हम किसी और दिन जानेंगे अगर आपके हमारा यह पोस्ट अच्छा लगा हो तो अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर जरूर करियेगा। THANK YOU जय हिन्द
अगर आप कोरोना के बारे में जानना चाहते होतो निचे दी गई लिंक क्लिक करिये
इसके साथ साथ अगर कीसी का कोई अंग में खराबी आती हे या वो काम करना बंद कर देता हे तो भी स्टेम कोशिकाओं की मदद से हम नए अंगो का निर्माण आसानी से कर सकते हे। आनुवंशिक बीमारिया जैसे की मधुमेह ( Diabetes ), डाउन सिंड्रोम (Down Syndrome) जैसी बिमारिओ का इलाज संभव हो सकता हे.
स्टेम कोशिकाओं का कहा और कैसे इस्तेमाल किया जा सकता हे वो हम किसी और दिन जानेंगे अगर आपके हमारा यह पोस्ट अच्छा लगा हो तो अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर जरूर करियेगा। THANK YOU जय हिन्द
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